लाल बलुआ पत्थर और संगमरमर से बना यह किला राजपूत वास्तुकला का शानदार नमूना है। शीश महल, दीवान-ए-आम और खूबसूरत बगीचे यहाँ के मुख्य आकर्षण हैं। शाम को लाइट एंड साउंड शो देखना न भूलें.
953 छोटी खिड़कियों वाला यह महल 'पैलेस ऑफ विंड्स' के नाम से प्रसिद्ध है। 1799 में बनाया गया यह महल राजपरिवार की महिलाओं के लिए बनाया गया था ताकि वे सड़क पर होने वाले त्योहारों को देख सकें.
जयपुर के बीचोंबीच स्थित यह महल राजस्थानी और मुगल वास्तुकला का अद्भुत मिश्रण है। मुबारक महल, चंद्र महल और म्यूजियम यहाँ के प्रमुख आकर्षण हैं। यह आज भी शाही परिवार का निवास स्थान है.
18वीं सदी में महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय द्वारा बनाई गई यह खगोलीय वेधशाला UNESCO World Heritage Site है। यहाँ 19 खगोलीय उपकरण हैं, जिनमें दुनिया की सबसे बड़ी पत्थर की धूपघड़ी भी शामिल है.
मान सागर झील के बीच स्थित यह महल अपनी खूबसूरती के लिए प्रसिद्ध है। पानी में तैरता हुआ यह महल पाँच मंजिला है, जिसमें से केवल एक मंजिल दिखाई देती है। नाहरगढ़ फोर्ट से इसका शानदार दृश्य देखा जा सकता है
अरावली पर्वत श्रृंखला पर स्थित यह किला जयपुर शहर का मनोरम दृश्य प्रस्तुत करता है। यह किला जयपुर की सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा था। सनसेट के समय यहाँ का नजारा बेहद खूबसूरत होता है.
'चील का टीला' पहाड़ी पर स्थित यह किला अपनी विशाल तोप 'जयबाण' के लिए प्रसिद्ध है, जो दुनिया की सबसे बड़ी तोपों में से एक है। यह किला आमेर फोर्ट की सुरक्षा के लिए बनाया गया था.
राम निवास गार्डन में स्थित यह संग्रहालय राजस्थान का सबसे पुराना संग्रहालय है। यहाँ मिट्टी के बर्तन, हस्तशिल्प, हथियार, पेंटिंग्स और यहाँ तक कि एक मिस्र की ममी भी प्रदर्शित है
मोती डूंगरी पहाड़ी पर सफेद संगमरमर से बना यह मंदिर भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी को समर्पित है। सनसेट के बाद यहाँ की लाइटिंग बेहद खूबसूरत होती है और शाम को आरती भी होती है
जयपुर से लगभग 20 किमी दूर स्थित यह सांस्कृतिक गांव रिसॉर्ट राजस्थानी संस्कृति का जीवंत अनुभव प्रदान करता है। यहाँ लोक नृत्य, पारंपरिक संगीत, ऊंट की सवारी और प्रामाणिक राजस्थानी भोजन का आनंद लिया जा सकता है